Shame on Indian Democracy: The Soni Sori Episode

Himanshu Kumar

क्या आपकी कोई बेटी है ? चलो थोड़ी देर के लिए उसका नाम सोनी सोरी रख देते हैं !

उसे पुलिस वाले बाँध कर घसीट रहे हैं , और वो रोते रोते आपको पुकार रही है , पापा मुझे बचा लो ! आप खड़े होकर देख रहे हैं , आपकी मासूम लाडली बेटी को पुलिस वाले घसीटते हुए ले जा रहे हैं ! इस समय आप विवश होंगे या क्रोधित ? क्या करने का ख्याल आएगा आपके मन में ?

और उन्ही पलों में जब आपकी मासूम बेटी को पुलिस वाले घसीट रहे हैं , मैं उसी मनः स्तिथी में आपके विचार जानना चाहता हूँ , “भारतीय लोकतंत्र ” “संविधान” , “महान भारतीय संस्कृतिक परम्पराओं” के बारे में ? चेहरा उधर मत घुमाइए ! मुझसे आँख मिला कर उत्तर दीजिये ! आपकी बेटी अभी भी चीख कर आपकी ओर आशा से देख रही है ! और आप उसकी चीखों का जवाब नहीं दे रहे हैं ? सोनी सोरी की चीखें इतिहास हो जायेंगी ! पर हमारा पीछा नहीं छोड़ेंगी !

हमें माफ़ कर देना सोनी सोरी , हमारा लोकतंत्र तुम्हारे लिए नहीं है , न संसद , न हमारी दिखावटी नैतिकता और धार्मिकता , ये सब हमारे लिए हैं ! तुम आदिवासी हो , इसलिए तुम्हारे लिए है ,पिटाई , खुरदुरी ज़मीन पर पशु की तरह घसीटे जाना , ज़िंदगी भर जेल में बैठकर ,अपने तीन बच्चों को याद कर रोना , और फिर एक दिन चुपचाप एक गुमनाम मौत म़र जाना !

“सोनी सोरी मेरी बच्ची” मैं तुम्हे भारतीय राष्ट्र की ओर से अंतिम विदाई देता हूँ ! आदिवासियों के सम्पूर्ण संहार के बाद जब हमारा प्रधान मंत्री, लाल किले से इस एतिहासिक अपराध के लिए क्षमा मांगेगा , तब तुम हमें स्वर्ग से क्षमा कर देना ,सोनी सोरी ! अलविदा अलविदा

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